Tuesday, February 26, 2019

मसूद अजहर को आईएसआई ने रावलपिंडी से बहावलपुर भेजा, सुरक्षा भी बढ़ाई

दिल्ली. पुलवामा में फिदायीन हमले के बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने जैश-ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को 'सेफ जोन' में छिपा दिया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, अजहर को 17-18 फरवरी यानी पुलवामा हमले के बाद रावलपिंडी से बहावलपुर के नजदीक कोटघानी भेजा गया है। आईएसआई ने उसकी सुरक्षा भी बढ़ा दी है।

बताया जा रहा है कि पुलवामा में जब हमला हुआ उस वक्त अजहर रावलपिंडी में सेना के अस्पताल में भर्ती था। उसे 17-18 फरवरी को कोटघानी भेजा गया।

हिजबुल सरगना सलाहुद्दीन से भी मिला अजहर

जानकारी ये भी है कि अजहर ने हिजबुल के सरगना सैयद सलाउद्दीन से भी मुलाकात की है। खुफिया सूत्रों का मानना है कि दोनों आतंकी सरगनाओं के बीच हुई इस मीटिंग में एक-दूसरे को मदद देकर फिर से मजबूत होने की साजिश पर बात हुई होगी।

जैश का संस्थापक है अजहर

अजहर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक है। 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले की जैश ने ही जिम्मेदारी ली है। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद से ही भारत में पाकिस्तान से बदला लेने की मांग उठ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी साफ कह चुके हैं कि आतंक के सरपरस्तों से पूरा हिसाब किया जाएगा। यहां तक कि उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अपने किए गए वादे पर खरा उतरने की नसीहत दी है।

'पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर भी अलग-थलग'
ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) आर विनायक  ने कहा, 'पाकिस्तान कोई भी स्ट्राइक करने के काबिल नहीं है। वो सिर्फ आतंकियों के सहारे प्रॉक्सी वॉर कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान सिर्फ चीन की ओर देख सकता है। वो यूएन में जाकर भी बस चिल्ला भर सकते हैं, लेकिन अभी पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ा हुआ है, इसलिए कुछ नहीं होगा।' 

'भारत की तीनों सेनाओं का पंच बेहद स्ट्रॉन्ग'
विनायक ने आगे बताया, 'हमारी आर्मी प्रोफेशनल है। हमारी क्षमता काबिले तारीफ है। हमारी तीनों सेनाओं की ऊर्जा काफी मजबूत है। इनके साथ मिलने से जो जो मुठ्ठी बनती है उसका पंच बहुत स्ट्रॉन्ग होता है।' हमारे पास मिराज 2000 जैसे लड़ाकू विमान हैं जो 40,000 फीट ऊपर से एक बाल्टी के अंदर भी बम गिरा सकते हैं।'

'पाक के खिलाफ एक्शन ही विकल्प'
विनायक ने कहा 'भारत को यह जवाब देना ही था, जिस तरह उन्होंने हमारे सीआरपीएफ काफिले पर हमला कर 40 बहादुर जवानों को मारा था, तो ये कार्रवाई जरूरी थी। उन्हें पता चलना चाहिए था कि भारत से टकराएंगे तो चूर-चूर हो जाएंगे। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा। सैन्य कार्रवाई ही इसका एकमात्र विकल्प है।'

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