वित्त मामलों की संसदीय समिति को सौंपी गई कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में जैसे ही यह बात निकलकर आई कि नोटबंदी की वजह से देश का किसान और खेती बर्बाद हो गई, इस पर हंगामा मच गया.
नवभारत टाइम्स में प्रकाशित समाचार के अनुसार, इस रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने सरकार पर कड़ा हमला बोला. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि जब कृषि मंत्रालय खुद मान रहा है कि नोटबंदी से नुकसान हुआ है उसके बाद भी प्रधानमंत्री अपनी रैलियों में इसके गुणगान कर रहे हैं.
अखबार लिखता है कि इस रिपोर्ट की चौतरफा आलोचना होने के बाद कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने ट्वीट कर रिपोर्ट के तथ्यों को गलत बताया. अपनी सफाई में कृषि मंत्री ने लिखा कि नोटबंदी शुरू होने से पहले ही ज़्यादातर बीज बंट चुके थे. गेहूं के बीजों का वितरण चल रहा था.
नमो ऐप के ज़रिए खुली बीजेपी सांसदों की पोल
हिंदुस्तान अख़बार में प्रकाशित समाचार के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से बनाई गई नमो ऐप ने भाजपा के ही 90 सांसदों की पोल खोल दी.
ख़बर के मुताबिक इसमें से कुछ के क्षेत्र की जनता उनके कामकाज से खुश नहीं तो कुछ ऐसे हैं जिनसे कार्यकर्ता भी नाराज़ हैं. ख़बर के मुताबिक इनमें से सबसे अधिक सांसद उत्तर प्रदेश के हैं.
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने सांसदों और हर लोकसभा क्षेत्र से फ़ीडबैक जुटा रही है. इसी के तहत नमो एप के ज़रिए जनता से उनकी राय मांगी गई.
भारतीय थल सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा है कि देश में मौजूद अवैध प्रवासियों को देश के बाहर भेजा जाना चाहिए.
टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित इस ख़बर के मुताबिक बिपिन रावत ने कहा कि वे राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रेशन यानी एनआरसी का समर्थन करते हैं और जो लोग इसके समर्थन में नहीं हैं वे देश की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लेते.
ख़बर के अनुसार सेना प्रमुख ने कहा कि देश के राजनीतिक दल अवैध प्रवासियों को देश में रुकने में मदद करते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ संगठन हैं जो इन अवैध प्रवासियों को देश की नागरिकता दिलाने की कोशिशें करते हैं.
अक्षय कुमार से एसआईटी की पूछताछ
बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार से बुधवार को एसआईटी ने पूछताछ की. पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान एक गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले में यह पूछताछ की गई.
जनसत्ता में प्रकाशित समाचार के अनुसार अक्षय कुमार से क़रीब 1 घंटा 40 मिनट तक पूछताछ की गई. अक्षय पर आरोप हैं कि उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम और सुखबीर बादल के बीच अपने मुंबई स्थित फ्लैट में मीटिंग करवाई थी.
अखबार लिखता है कि अक्षय कुमार ने खुद पर लगे आरोपों को ग़लत बताया और कहा कि पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल से साल 2011 के दौरान हुए कबड्डी कप के दौरान ही उनकी मुलाकात हुई थी, इसके अलावा वे कभी नहीं मिले.
Wednesday, November 21, 2018
Monday, November 12, 2018
फ़ेक न्यूज़ के ख़िलाफ़ बीबीसी की मुहिम: फ़र्ज़ी ख़बरों के परे क्या है
जो लोग मीडिया को समझते हैं, शिक्षित हैं और उन तक पहुंच रही ख़बरों की विश्वसनीयता का आकलन करते हैं, वे फर्ज़ी ख़बरों को कम फैलाते हैं.
यही वजह है कि बीबीसी पत्रकारों की टीम ब्रिटेन और भारत के स्कूलों में जाकर मीडिया साक्षरता पर वर्कशॉप कर रही है.
'द रियल न्यूज़' नाम की ये वर्कशॉप बीबीसी के एक प्रोजेक्ट 'बियोंड फ़ेक न्यूज़' का हिस्सा है जो 12 नवंबर को शुरू हो रहा है.
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य दुनिया भर में फैल रही ग़लत और फर्ज़ी ख़बरों की समस्या का हल खोजना है.
ये प्रोजेक्ट मीडिया साक्षरता को लेकर उठाए गए बीबीसी के कई कदमों में से एक है. 'द रियल न्यूज़' मीडिया वर्कशॉप वैसा ही एक प्रोजेक्ट है जो हाल ही में ब्रिटेन में सफल रहा है.
कैसे रुकेंगी फर्जी ख़बरें
भारत का टेलीकॉम रेगुलेटरी कमीशन कहता है कि भारत में एक अरब से ज़्यादा सक्रिय मोबाइल कनेक्शन हैं और बहुत कम समय में ही करोड़ों लोग ऑनलाइन आने लगे हैं.
ज़्यादातर लोगों के लिए इंटरनेट का ज़रिया उनका मोबाइल फ़ोन ही है और बहुत से लोगों को खबरें चैट ऐप्स से मिलती हैं और वहीं वे उसे शेयर करते हैं.
ये लोगों से जुड़ने का एक अच्छा तरीका है लेकिन ये एक ऐसी जगह है जहां ग़लत या फ़र्ज़ी खबरें बिना किसी रोक-टोक के जल्दी फैलती हैं.
लोगों के पास जानकारी और ख़बरों की बाढ़ आ जाती है और वे सच और झूठ में अंतर नहीं कर पाते.
इसलिए बीबीसी की सोच है कि बच्चों और युवाओं को खबरों को समझना और उनकी सत्यता का आकलन सिखाना शुरू किया जाए.
ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ बच्चे और किशोर ही हैं जो चैट ऐप और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उनसे शुरूआत करने की दो वजहें हैं.
पहली तो ये कि वे अपने आस-पास के लोगों को प्रभावित कर सकते हैं जैसे उनके परिवार और उनके दोस्तों के परिवारों को भी.
दूसरी बात ये कि ये बच्चे और किशोर उस दौर में बड़े हुए हैं जहां चैट ऐप और इंटरनेट बातचीत का प्रमुख माध्यम है.
इस बात के मद्देनज़र हमने स्कूलों के लिए वर्कशॉप तैयार की ताकि छात्रों को मीडिया और डिजिटल दुनिया को लेकर जागरूक कर सकें, उन्हें उनके फ़ोन से मिलने वाले कंटेंट पर सोचने के लिए तैयार कर सकें और फ़ेक न्यूज़ को फैलाने से उन्हें रोक सकें.
यही वजह है कि बीबीसी पत्रकारों की टीम ब्रिटेन और भारत के स्कूलों में जाकर मीडिया साक्षरता पर वर्कशॉप कर रही है.
'द रियल न्यूज़' नाम की ये वर्कशॉप बीबीसी के एक प्रोजेक्ट 'बियोंड फ़ेक न्यूज़' का हिस्सा है जो 12 नवंबर को शुरू हो रहा है.
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य दुनिया भर में फैल रही ग़लत और फर्ज़ी ख़बरों की समस्या का हल खोजना है.
ये प्रोजेक्ट मीडिया साक्षरता को लेकर उठाए गए बीबीसी के कई कदमों में से एक है. 'द रियल न्यूज़' मीडिया वर्कशॉप वैसा ही एक प्रोजेक्ट है जो हाल ही में ब्रिटेन में सफल रहा है.
कैसे रुकेंगी फर्जी ख़बरें
भारत का टेलीकॉम रेगुलेटरी कमीशन कहता है कि भारत में एक अरब से ज़्यादा सक्रिय मोबाइल कनेक्शन हैं और बहुत कम समय में ही करोड़ों लोग ऑनलाइन आने लगे हैं.
ज़्यादातर लोगों के लिए इंटरनेट का ज़रिया उनका मोबाइल फ़ोन ही है और बहुत से लोगों को खबरें चैट ऐप्स से मिलती हैं और वहीं वे उसे शेयर करते हैं.
ये लोगों से जुड़ने का एक अच्छा तरीका है लेकिन ये एक ऐसी जगह है जहां ग़लत या फ़र्ज़ी खबरें बिना किसी रोक-टोक के जल्दी फैलती हैं.
लोगों के पास जानकारी और ख़बरों की बाढ़ आ जाती है और वे सच और झूठ में अंतर नहीं कर पाते.
इसलिए बीबीसी की सोच है कि बच्चों और युवाओं को खबरों को समझना और उनकी सत्यता का आकलन सिखाना शुरू किया जाए.
ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ बच्चे और किशोर ही हैं जो चैट ऐप और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उनसे शुरूआत करने की दो वजहें हैं.
पहली तो ये कि वे अपने आस-पास के लोगों को प्रभावित कर सकते हैं जैसे उनके परिवार और उनके दोस्तों के परिवारों को भी.
दूसरी बात ये कि ये बच्चे और किशोर उस दौर में बड़े हुए हैं जहां चैट ऐप और इंटरनेट बातचीत का प्रमुख माध्यम है.
इस बात के मद्देनज़र हमने स्कूलों के लिए वर्कशॉप तैयार की ताकि छात्रों को मीडिया और डिजिटल दुनिया को लेकर जागरूक कर सकें, उन्हें उनके फ़ोन से मिलने वाले कंटेंट पर सोचने के लिए तैयार कर सकें और फ़ेक न्यूज़ को फैलाने से उन्हें रोक सकें.
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