Tuesday, December 18, 2018

स्मार्टफोन न यूज करने पर मिलेगा 72 लाख का इनाम

मोबाइल फोन अब लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. दिन भर में कई घंटे स्मार्टफोन पर बिताए जा रहे हैं. कोकाकोला की एक कंपनी विटामिन वॉटर ने फोन न यूज करने पर ईनाम देने का ऐलान किया है. ये कंपनी 1 लाख डॉलर यानी लगभग 72 लाख रुपये तक का ईनाम दे सकती है.

इस अमेरिकी कंपनी की शर्त ये है कि आपको ये प्राइज जीतने के लिए बिना स्मार्टफोन के रहना होगा. ये कंपनी स्क्रॉल फ्री कॉन्टेस्ट चला रही है जिसका मकसद लोगों को स्मार्टफोन की लत छुड़ाना है. हालांकि आपको इस प्राइज को पाने के लिए एक दो दिन नहीं, बल्कि पूरे एक साल बिना स्मार्टफोन के रहना होगा.

इसके लिए एंट्री ली जा रही है जो 8 जनवरी 2019 तक चलेगी. एंट्री पाने के लिए क्रिएटिव ट्वीट या इंस्टाग्राम पोस्ट करना होगा. शॉर्ट लिस्ट होने के बाद एक साल तक बिना स्मार्टफोन के रहना होगा.

ऐसा नहीं है कि आप किसी को कॉल नहीं कर पाएंगे या कम्यूनिकेशन खत्म होगा. इस कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने वाले लोगों को 1996 एरा का फोन दिया जाएगा जो फीचर फोन है. जाहिर है इसमें न तो इंटरनेट चलेगा न ही आप वीडियोज या गाने सुन पाएंगे. इससे सिर्फ कॉल कर सकेंगे. हालांकि एक छूट दी गई है कैंडिडेट्स इस दौरान डेस्कटॉप कंप्यूटर या लैपटॉप यूज कर सकते हैं. अगर चाहें तो गूगल होम और ऐलेक्सा डिवाइस भी यूज कर सकते हैं. लेकिन मोबाइल और टैबलेट नहीं यूज करना है.

इस कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने के लिए या जीतने के लिए पहले तो आपको एक ट्वीट या इंस्टाग्राम पोस्ट करना होगा जिसमें NoPhoneforaYear हैशटैग के साथ ये बताना होगा कि आप बिना स्मार्टफोन के एक साल कैसे बिताएंगे.

संभावना ये भी है कि अगर आप 6 महीने भी अपने स्मार्टफोन के बिना बिता सकते हैं तो कंपनी इसके लिए आपको 10 हजार डॉलर यानी लगभग 7.2 लाख रुपये दे सकती है. 

कंपनी का कहना है कि लोगों की एंट्री लेने के लिए तीन प्वॉइंट्स जज किए जाएंगे. इनमें क्रिएटिविटी, ऑरिजनैलिटी और ह्यूमर शामिल है. जिस सब्मिशन ने हाई स्कोर किया वो जीतेगा.

एक साल तक आपने फोन यूज नहीं किया है ये कंपनी को कैसे पता चलेगा?
यह पता लगाने के लिए कि आपने एक साल तक स्मार्टफोन को न तो छुआ है और न ही यूज किया है. कंपनी लाई डिटेक्टर टेस्ट करेगी जो कॉन्टेस्ट के आखिर में होगा. अगर लाइ डिटेक्टर टेस्ट पास कर गए तो प्राइज मिलेगा वर्ना फेल.

Friday, December 14, 2018

कुंभ के लिए रेलवे ने कमर कसी, 800 स्पेशल गाड़ियां चलाने का ऐलान

रेलवे ने अगले साल जनवरी में प्रयागराज में आयोजित होने वाले कुंभ मेले के लिए 41 परियोजनाएं शुरू की हैं, जिनपर 700 करोड़ रुपये की लागत आएगी. रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि 41 परियोजनाओं में से 29 पूरी हो चुकी हैं. अन्य अंतिम चरण में हैं तथा जल्द पूरी होने वाली हैं.

उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के महाप्रबंधक राजीव चौधरी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि इलाहाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन पर चार बड़े अहातों का निर्माण किया गया है जिनमें 10,000 तीर्थयात्रियों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं. इनमें वेडिंग स्टॉल, पानी के बूथ, टिकट काउंटर, एलसीडी टीवी, सीसीटीवी, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग- अलग शौचालय होंगे. इसी तरह से अन्य स्टेशनों पर भी यात्री अहाते बनाए गए हैं.

कुंभ मेले के दौरान मेले में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए प्रयागराज जिले के विभिन्न स्टेशनों से करीब 800 विशेष ट्रेन चलाने का प्रस्ताव है. यह ट्रेनें एनसीआर की ओर से चलाई जाने वाली नियमित ट्रेनों से अलग होंगी. सभी यात्रियों के पास टिकट सुविधाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रयागराज के स्टेशनों पर 100 अतिरिक्त अनारक्षित टिकट काउंटर खोले जा रहे हैं.

रेलवे की 5000 ‘प्रवासी भारतीयों’को इलाहाबाद से नई दिल्ली ले जाने के लिए चार-पांच विशेष ट्रेनें चलाने की योजना है. ये प्रवासी भारतीय वाराणसी में होने वाले 'प्रवासी भारतीय दिवस' में शिरकत करने जाएंगे और वाराणसी से कुंभ मेले में हिस्सा लेने के लिए इलाहाबाद जाएंगे.

चौधरी ने बताया कि रेलवे, मेले के दौरान इस पवित्र शहर में यात्रियों की भारी भीड़ से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) समेत प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करेगा. उन्होंने कहा कि आईबीएम भीड़ नियंत्रण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर वीडियो विश्लेषण सेवा प्रदान करेगा जबकि स्थिति पर नजर रखने के लिए बड़ी संख्या में शक्तिशाली सीसीटीवी कैमरे होंगे और सूचनाएं प्रदर्शित करने के लिए कई एलईडी स्क्रीन होंगी.

विशेष मामले के तौर पर रेल मंत्रालय ने यह फैसला किया है कि इलाहाबाद क्षेत्र में पड़ने वाले 11 स्टेशनों से अनारक्षित रेलवे टिकटों की 15 दिन पहले से बुकिंग की इजाजत दी जाएगी. इलाहाबाद में उत्तर मध्य रेलवे ने 'रेल कुंभ सेवा मोबाइल एप्प' का भी शुभारंभ किया है.

Tuesday, December 11, 2018

150 कर्मचारी, 4 हाथी, 3 जेसीबी ने घेरा बाघ, गन से इंजेक्शन देकर किया बेहोश, 10 दिन से थी दहशत

शहर में मौजूद बाघ दस दिन बाद वन विभाग की पकड़ में आया है। सारनी के राख डैम में 2 दिनों के मेगा ऑपरेशन में यह सफलता मिली। 4 हाथी, 3 जेसीबी और 150 से ज्यादा लोगों की टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।  सारनी में 1 दिसंबर को कोल हेंडलिंग प्लांट के पास बाघ दिखा था। 10 दिनों से बाघ की मौजूदगी से लोगों में दहशत थी।

नगर पालिका क्षेत्र में धारा 144 लागू थी। एसटीआर 8 दिन से रेस्क्यू कर रहा था। वन विभाग और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम का 2 दिनों से राख बांध में मेगा रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था। सोमवार शाम 4.30 बजे टीम को बाघ को ट्रेंकुलाइजर करने में सफलता मिली। इंजेक्शन लगने के 15 मिनट बाद बाघ बेहोश हुआ। इसके बाद उसे पिंजरे में बंद कर दिया।

बांधवगढ़ में बाघ का शव मिला : उमरिया |  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सोमवार दोपहर पनपथा बफर जोन से 7 से 8 साल की उम्र के एक बाघ का शव मिला है। बाघ की मौत के कारणों की जांच की जा रही है। प्रबंधन का कहना है कि शव के परीक्षण के बाद ही मौत के कारणों का पता चलेगा।

इसके लिए 8 दिसंबर को वे पत्नी, बेटी व अन्य रिश्तेदारों के साथ पाली जाने के लिए जयपुर-हैदराबाद सुपरफास्ट एक्सप्रेस की एस-3 बोगी में सवार हुए। 9 दिसंबर को दोपहर 03:13 बजे ट्रेन बैरागढ़ स्टेशन पहुंची। दो मिनट यहां रुककर ट्रेन आगे बढ़ी। अब्बा राम ने बताया कि इस बीच ललिता बाथरूम जाने का कहकर बर्थ से उठी। पीछे-पीछे मां भी गई। बाथरूम से निकलकर ललिता दरवाजे के पास आकर खड़ी हो गई। खारखेड़ी के पास अचानक वह चलती ट्रेन से बाहर जा गिरी।

चेन-पुलिंग कर रुकवाई ट्रेन : अब्बा राम के मुताबिक बेटी के गिरने का पता चलते ही उन्होंने चेन पुलिंग कर ट्रेन रुकवाई। सभी दौड़कर दो किमी पीछे गए। हादसे की सूचना पर खजूरी सड़क पुलिस भी आ गई। एएसआई श्रीकांत द्विवेदी ने बताया कि ग्राम खारखेड़ी के पीछे से गुजरने वाली लाइन पर ललिता का क्षतिग्रस्त शव अप-डाउन ट्रैक के बीच में पड़ा मिला। यहां ट्रेन हल्का मोड़ लेती है। जब हादसा हुआ, तब ट्रेन की रफ्तार करीब 110 किमी प्रतिघंटा रही होगी।

ट्रेन के टर्न हाेने पर तेजी से अंदर की ओर आती है हवा, हो सकता है हादसा

ये हादसा संत हिरदाराम नगर स्टेशन से 15 किमी दूर हुआ है, यानी उस वक्त ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार में थी। जैसा पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर ट्रेन हल्के टर्न पर थी। ऐसे में ट्रेन के गुजरने से उपजी हवा तेजी से खुले दरवाजे से अंदर की तरफ आती है। इस परिस्थिति में अभिकेंद्रीय बल उत्पन्न होता है, जो बगैर कोई सहारा लिए दरवाजे के पास खड़े व्यक्ति को बाहर की ओर ढकेल सकता है। ललिता के साथ हुआ हादसा भी ऐसी ही परिस्थिति में हुआ होगा। इसलिए रेलवे बोर्ड चलती ट्रेन में दरवाजे के पास खड़े न होने की सलाह देता है। - सीएस शर्मा, रेलवे एक्सपर्ट

Wednesday, November 21, 2018

नोटबंदी से खेती बर्बाद होने की रिपोर्ट पर हंगामा

वित्त मामलों की संसदीय समिति को सौंपी गई कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में जैसे ही यह बात निकलकर आई कि नोटबंदी की वजह से देश का किसान और खेती बर्बाद हो गई, इस पर हंगामा मच गया.

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित समाचार के अनुसार, इस रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने सरकार पर कड़ा हमला बोला. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि जब कृषि मंत्रालय खुद मान रहा है कि नोटबंदी से नुकसान हुआ है उसके बाद भी प्रधानमंत्री अपनी रैलियों में इसके गुणगान कर रहे हैं.

अखबार लिखता है कि इस रिपोर्ट की चौतरफा आलोचना होने के बाद कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने ट्वीट कर रिपोर्ट के तथ्यों को गलत बताया. अपनी सफाई में कृषि मंत्री ने लिखा कि नोटबंदी शुरू होने से पहले ही ज़्यादातर बीज बंट चुके थे. गेहूं के बीजों का वितरण चल रहा था.

नमो ऐप के ज़रिए खुली बीजेपी सांसदों की पोल

हिंदुस्तान अख़बार में प्रकाशित समाचार के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से बनाई गई नमो ऐप ने भाजपा के ही 90 सांसदों की पोल खोल दी.

ख़बर के मुताबिक इसमें से कुछ के क्षेत्र की जनता उनके कामकाज से खुश नहीं तो कुछ ऐसे हैं जिनसे कार्यकर्ता भी नाराज़ हैं. ख़बर के मुताबिक इनमें से सबसे अधिक सांसद उत्तर प्रदेश के हैं.

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने सांसदों और हर लोकसभा क्षेत्र से फ़ीडबैक जुटा रही है. इसी के तहत नमो एप के ज़रिए जनता से उनकी राय मांगी गई.

भारतीय थल सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा है कि देश में मौजूद अवैध प्रवासियों को देश के बाहर भेजा जाना चाहिए.

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित इस ख़बर के मुताबिक बिपिन रावत ने कहा कि वे राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रेशन यानी एनआरसी का समर्थन करते हैं और जो लोग इसके समर्थन में नहीं हैं वे देश की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लेते.

ख़बर के अनुसार सेना प्रमुख ने कहा कि देश के राजनीतिक दल अवैध प्रवासियों को देश में रुकने में मदद करते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ संगठन हैं जो इन अवैध प्रवासियों को देश की नागरिकता दिलाने की कोशिशें करते हैं.

अक्षय कुमार से एसआईटी की पूछताछ
बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार से बुधवार को एसआईटी ने पूछताछ की. पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान एक गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले में यह पूछताछ की गई.

जनसत्ता में प्रकाशित समाचार के अनुसार अक्षय कुमार से क़रीब 1 घंटा 40 मिनट तक पूछताछ की गई. अक्षय पर आरोप हैं कि उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम और सुखबीर बादल के बीच अपने मुंबई स्थित फ्लैट में मीटिंग करवाई थी.

अखबार लिखता है कि अक्षय कुमार ने खुद पर लगे आरोपों को ग़लत बताया और कहा कि पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल से साल 2011 के दौरान हुए कबड्डी कप के दौरान ही उनकी मुलाकात हुई थी, इसके अलावा वे कभी नहीं मिले.

Monday, November 12, 2018

फ़ेक न्यूज़ के ख़िलाफ़ बीबीसी की मुहिम: फ़र्ज़ी ख़बरों के परे क्या है

जो लोग मीडिया को समझते हैं, शिक्षित हैं और उन तक पहुंच रही ख़बरों की विश्वसनीयता का आकलन करते हैं, वे फर्ज़ी ख़बरों को कम फैलाते हैं.

यही वजह है कि बीबीसी पत्रकारों की टीम ब्रिटेन और भारत के स्कूलों में जाकर मीडिया साक्षरता पर वर्कशॉप कर रही है.

'द रियल न्यूज़' नाम की ये वर्कशॉप बीबीसी के एक प्रोजेक्ट 'बियोंड फ़ेक न्यूज़' का हिस्सा है जो 12 नवंबर को शुरू हो रहा है.

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य दुनिया भर में फैल रही ग़लत और फर्ज़ी ख़बरों की समस्या का हल खोजना है.

ये प्रोजेक्ट मीडिया साक्षरता को लेकर उठाए गए बीबीसी के कई कदमों में से एक है. 'द रियल न्यूज़' मीडिया वर्कशॉप वैसा ही एक प्रोजेक्ट है जो हाल ही में ब्रिटेन में सफल रहा है.

कैसे रुकेंगी फर्जी ख़बरें
भारत का टेलीकॉम रेगुलेटरी कमीशन कहता है कि भारत में एक अरब से ज़्यादा सक्रिय मोबाइल कनेक्शन हैं और बहुत कम समय में ही करोड़ों लोग ऑनलाइन आने लगे हैं.

ज़्यादातर लोगों के लिए इंटरनेट का ज़रिया उनका मोबाइल फ़ोन ही है और बहुत से लोगों को खबरें चैट ऐप्स से मिलती हैं और वहीं वे उसे शेयर करते हैं.

ये लोगों से जुड़ने का एक अच्छा तरीका है लेकिन ये एक ऐसी जगह है जहां ग़लत या फ़र्ज़ी खबरें बिना किसी रोक-टोक के जल्दी फैलती हैं.

लोगों के पास जानकारी और ख़बरों की बाढ़ आ जाती है और वे सच और झूठ में अंतर नहीं कर पाते.

इसलिए बीबीसी की सोच है कि बच्चों और युवाओं को खबरों को समझना और उनकी सत्यता का आकलन सिखाना शुरू किया जाए.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ बच्चे और किशोर ही हैं जो चैट ऐप और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उनसे शुरूआत करने की दो वजहें हैं.

पहली तो ये कि वे अपने आस-पास के लोगों को प्रभावित कर सकते हैं जैसे उनके परिवार और उनके दोस्तों के परिवारों को भी.

दूसरी बात ये कि ये बच्चे और किशोर उस दौर में बड़े हुए हैं जहां चैट ऐप और इंटरनेट बातचीत का प्रमुख माध्यम है.

इस बात के मद्देनज़र हमने स्कूलों के लिए वर्कशॉप तैयार की ताकि छात्रों को मीडिया और डिजिटल दुनिया को लेकर जागरूक कर सकें, उन्हें उनके फ़ोन से मिलने वाले कंटेंट पर सोचने के लिए तैयार कर सकें और फ़ेक न्यूज़ को फैलाने से उन्हें रोक सकें.