Tuesday, December 11, 2018

150 कर्मचारी, 4 हाथी, 3 जेसीबी ने घेरा बाघ, गन से इंजेक्शन देकर किया बेहोश, 10 दिन से थी दहशत

शहर में मौजूद बाघ दस दिन बाद वन विभाग की पकड़ में आया है। सारनी के राख डैम में 2 दिनों के मेगा ऑपरेशन में यह सफलता मिली। 4 हाथी, 3 जेसीबी और 150 से ज्यादा लोगों की टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।  सारनी में 1 दिसंबर को कोल हेंडलिंग प्लांट के पास बाघ दिखा था। 10 दिनों से बाघ की मौजूदगी से लोगों में दहशत थी।

नगर पालिका क्षेत्र में धारा 144 लागू थी। एसटीआर 8 दिन से रेस्क्यू कर रहा था। वन विभाग और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम का 2 दिनों से राख बांध में मेगा रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था। सोमवार शाम 4.30 बजे टीम को बाघ को ट्रेंकुलाइजर करने में सफलता मिली। इंजेक्शन लगने के 15 मिनट बाद बाघ बेहोश हुआ। इसके बाद उसे पिंजरे में बंद कर दिया।

बांधवगढ़ में बाघ का शव मिला : उमरिया |  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सोमवार दोपहर पनपथा बफर जोन से 7 से 8 साल की उम्र के एक बाघ का शव मिला है। बाघ की मौत के कारणों की जांच की जा रही है। प्रबंधन का कहना है कि शव के परीक्षण के बाद ही मौत के कारणों का पता चलेगा।

इसके लिए 8 दिसंबर को वे पत्नी, बेटी व अन्य रिश्तेदारों के साथ पाली जाने के लिए जयपुर-हैदराबाद सुपरफास्ट एक्सप्रेस की एस-3 बोगी में सवार हुए। 9 दिसंबर को दोपहर 03:13 बजे ट्रेन बैरागढ़ स्टेशन पहुंची। दो मिनट यहां रुककर ट्रेन आगे बढ़ी। अब्बा राम ने बताया कि इस बीच ललिता बाथरूम जाने का कहकर बर्थ से उठी। पीछे-पीछे मां भी गई। बाथरूम से निकलकर ललिता दरवाजे के पास आकर खड़ी हो गई। खारखेड़ी के पास अचानक वह चलती ट्रेन से बाहर जा गिरी।

चेन-पुलिंग कर रुकवाई ट्रेन : अब्बा राम के मुताबिक बेटी के गिरने का पता चलते ही उन्होंने चेन पुलिंग कर ट्रेन रुकवाई। सभी दौड़कर दो किमी पीछे गए। हादसे की सूचना पर खजूरी सड़क पुलिस भी आ गई। एएसआई श्रीकांत द्विवेदी ने बताया कि ग्राम खारखेड़ी के पीछे से गुजरने वाली लाइन पर ललिता का क्षतिग्रस्त शव अप-डाउन ट्रैक के बीच में पड़ा मिला। यहां ट्रेन हल्का मोड़ लेती है। जब हादसा हुआ, तब ट्रेन की रफ्तार करीब 110 किमी प्रतिघंटा रही होगी।

ट्रेन के टर्न हाेने पर तेजी से अंदर की ओर आती है हवा, हो सकता है हादसा

ये हादसा संत हिरदाराम नगर स्टेशन से 15 किमी दूर हुआ है, यानी उस वक्त ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार में थी। जैसा पुलिस का कहना है कि घटनास्थल पर ट्रेन हल्के टर्न पर थी। ऐसे में ट्रेन के गुजरने से उपजी हवा तेजी से खुले दरवाजे से अंदर की तरफ आती है। इस परिस्थिति में अभिकेंद्रीय बल उत्पन्न होता है, जो बगैर कोई सहारा लिए दरवाजे के पास खड़े व्यक्ति को बाहर की ओर ढकेल सकता है। ललिता के साथ हुआ हादसा भी ऐसी ही परिस्थिति में हुआ होगा। इसलिए रेलवे बोर्ड चलती ट्रेन में दरवाजे के पास खड़े न होने की सलाह देता है। - सीएस शर्मा, रेलवे एक्सपर्ट

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