Thursday, February 7, 2019

खेती के लिए गारंटी फ्री कर्ज की सीमा 60 हजार बढ़ाई गई, अब लिमिट 1.60 लाख रुपए

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने किसानों के लिए कॉलेटरल फ्री लोन की लिमिट 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.60 लाख रुपए कर दी है। यानी, अब किसानों को 1.60 लाख रुपए तक का लोन लेने के लिए कोई गारंटी देने की जरूरत नहीं होगी। आरबीआई ने गुरुवार को इसका ऐलान किया। इस फैसले से खासकर उन किसानों को फायदा हो, जिनके पास खेती योग्य जमीन नहीं है।

किसानों के लिए गारंटी फ्री लोन की लिमिट 2010 में 1 लाख रुपए फिक्स की गई थी। आरबीआई ने महंगाई बढ़ने और किसानों की लागत बढ़ने का ध्यान रखते हुए लिमिट बढ़ाने का फैसला लिया है। गारंटी फ्री लोन की लिमिट बढ़ाने का सर्कुलर जल्द जारी किया जाएगा। एग्रीकल्चर लोन से जुड़े मामलों को देखने के लिए वर्किंग ग्रुप का गठन भी किया जाएगा।

7 दिन में किसानों के लिए दूसरा बड़ा ऐलान
सरकार ने 1 जनवरी को बजट में ऐलान किया था कि 5 एकड़ तक की खेती योग्य जमीन वाले किसानों को सालाना 6 हजार रुपए दिए जाएंगे। यह रकम 2-2 हजार की तीन किश्तों में किसानों के खाते में जमा की जाएगी। पहली किश्त मार्च से पहले दी जाएगी। यह घोषणा भी की गई थी कि पशु पालन-मत्स्य पालन करने वाले किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से लिए गए कर्ज पर ब्याज में 2% की छूट दी जाएगी। आपदा की स्थिति में जहां एनडीआरएफ की तैनाती होगी, वहां सभी किसानों को फसल ऋण पर ब्याज में 2% की छूट मिलेगी। कर्ज री-शेड्यूल होने के बाद समय पर कर्ज लौटाने पर ब्याज में 3% की अतिरिक्त छूट मिलेगी। इस तरह 5% की छूट मिल सकेगी।

राहुल ने कहा, ‘‘यह देश किसी एक जाति-धर्म-भाषा का नहीं है। यह देश हिंदुस्तान के हर व्यक्ति का है। लड़ाई दो विचारधाराओं के बीच में है। एक विचारधारा कहती है कि यह देश सबका है। मैं उदाहरण देना चाहता हूं। हिंदुस्तान के पहले शिक्षा मंत्री कौन थे? मौलाना आजाद। आप अगर आईआईटी और आईआईएम, शिक्षा व्यवस्था की बात करते हो तो आपको मौलाना आजाद की बात करनी पड़ेगी। स्पेस प्रोग्राम की नींव विक्रम साराभाई ने रखी, वह जैन धर्म के थे। अगर आप सफेद क्रांति की बात करते हो तो आपको कुरियन की बात करनी होगी। अगर आप 1971 जंग की बात करते हो तो आपको मानकेशॉ की बात करनी होगी। लिबरलाइजेशन की बात करते हो तो आपको मनमोहन सिंह की बात करनी होगी।’’

हम संस्थानों की रक्षा करेंगे

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री होते हुए सुप्रीम कोर्ट के चार जज बाहर आकर कहते हैं कि हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है। जस्टिस लोया का नाम लेते हैं और इनडायरेक्टली कहते हैं अमित शाह भाजपा के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट को काम नहीं करने दे रहे हैं। ये अपने आपको हिंदुस्तान के ऊपर समझते हैं। यह सोचते हैं कि देश नीचे है और हम ऊपर। तीन महीने में यह देश इनको समझाने जा रहा है कि देश ऊपर है और आप नीचे।’’

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