Wednesday, January 9, 2019

UPA के आधार का मास्टर माइंड नीलेकणी अब मोदी के कैशलेस ट्रांसफर के प्रभारी

पूर्व की यूपीए सरकार में आधार के मास्टर माइंड और इन्‍फोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी को केन्द्रीय रिजर्व बैंक के डिजिटल पेमेंट समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया है. आरबीआई ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल पेमेंट कमेटी समिति गठित की है.  इस कमेटी में नीलेकणी समेत पांच सदस्य होंगे. कमेटी में नीलेकणी के अलावा पूर्व आरबीआई डिप्टी गवर्नर एच आर खान, विजया बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ किशोर सनसी, आईटी और स्टील मंत्रालय में पूर्व सचिव अरुणा शर्मा और आईआईएम अहदाबाद के चीफ इनोवेशन ऑफिसर संजय जैन शामिल हैं.

क्‍या होगा काम

कमेटी का काम देश में डिजिटल पेमेंट की मौजूदा स्थिति और इसकी खामियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना और इन समस्याओं को दूर करने के उपाय सुझाना है. इसके अलावा कमेटी डिजिटल पेमेंट के अधिक इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन में तेजी लाने के लिए क्रॉस कंट्री एनालिसिस भी करेगी. यह कमेटी पहली बैठक के 90 दिनों के बाद अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.

कौन हैं नंदन नीलेकणी

बता दें कि देश की दूसरी बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इन्‍फोसिस ने 2017 में नंदन नीलेकणी को कंपनी का चेयरमैन नियुक्त किया था. आधार परियोजना को लेकर चर्चा में रहे नीलेकणी मार्च 2002 से अप्रैल 2007 तक कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे. उसके बाद वह केंद्र सरकार के भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यूआईडीएआई के प्रमुख बनाये गये.नीलेकणी 2014 में कांग्रेस के टिकट पर बंगलूरु की साउथ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि, उन्हें भाजपा के अनंत कुमार से हार का सामना करना पड़ा था. वे 2015 से राजनीति में सक्रिय नहीं हैं.

कैग ने सुझाव दिया है कि प्रावधान नियमों का इंपोर्टर अनुचित लाभ नहीं ले सकें, इसके लिए सेंट्रल इनडायरेक्‍ट टैक्‍स और सीमा शुल्क बोर्ड को इनकी समीक्षा करनी चाहिए.  कार्गो को छोड़ने की छूट सिर्फ विरले मामलों में ही दी जानी चाहिए.

भारतीय मुद्रा रुपये में डॉलर के मुकाबले पिछले सत्र से बढ़त देखी गई. रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले पिछले सत्र से 15 पैसे की बढ़त के साथ 70.05 पर खुला. पिछले सत्र में रुपये में कमजोरी आई थी, जिसकी मुख्य वजह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में आई तेजी रही है. कमोडिटी विश्लेषक बताते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में तेजी आने से भारत में तेल आयात के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी, इसलिए रुपये पर दबाव आया, हालांकि पिछले सत्र के मुकाबले रुपया थोड़ा संभला है.

उधर, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत का सूचकांक डॉलर इंडेक्स बुधवार को फि0.11 नीचे फिसलकर 95.377 के स्तर पर आ गया. दरअसल, इन छह मुद्राओं के समूह में सबसे अधिक भारांक वाली मुद्रा यूरो और आस्ट्रेलियन डॉलर व ब्रिटिश पौंड में डॉलर के मुकाबले मजबूती रही, जबकि जापानी येन में कमजोरी दर्ज की गई.

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